बालरवि की ऊष्मा सी ।
चन्द्र किरणों की शीतलता सी ।
मेरी माँ की ममता जैसे,
कुसुम कली की कोमलता सी ।।
हिमपर्वत की कर्मठता सी ।
सुरसरिता की चपलता सी ।
परिश्रम करते माँ को देखा,
जैसे घड़ी की निरंतरता सी ।।
धीमती हैं शारदा सी ।
महासिंधु की गंभीरता सी ।
लक्ष्य की ओर प्रेरित करती,
जैसे ईश में आस्था सी ।।
सिंहनी की निडरता सी ।
और दुर्गा की पराक्रमता सी ।
सदा ही माँ की छवि है देखी,
स्वाभिमानी मणिकर्णिका सी ।।
-मेघा
चन्द्र किरणों की शीतलता सी ।
मेरी माँ की ममता जैसे,
कुसुम कली की कोमलता सी ।।
हिमपर्वत की कर्मठता सी ।
सुरसरिता की चपलता सी ।
परिश्रम करते माँ को देखा,
जैसे घड़ी की निरंतरता सी ।।
धीमती हैं शारदा सी ।
महासिंधु की गंभीरता सी ।
लक्ष्य की ओर प्रेरित करती,
जैसे ईश में आस्था सी ।।
सिंहनी की निडरता सी ।
और दुर्गा की पराक्रमता सी ।
सदा ही माँ की छवि है देखी,
स्वाभिमानी मणिकर्णिका सी ।।
-मेघा

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