कदम से कदम मिलाये कुछ दूर साथ चले आओ,
हांथों में हाथ थामे कुछ पल तो बैठ जाओ,
नयनों से नयन मिलाये कुछ अनकही बातें समझ जाओ,
तनिक ठहर जाओ, ठहर जाओ, ठहर जाओ ।
रेत से फिसलते ये लम्हों को जी लो,
कुछ देर पास रह, मीठी यादें संजो लो,
जिंदगी की भागदौड़ से कुछ वक़्त तो चुरा लाओ,
तनिक ठहर जाओ, ठहर जाओ, ठहर जाओ ।
ऐशोआराम की कश्मकश में जिंदगी पीछे रह गयी,
कुछ बनने-पाने की ख्वाइश में देखो उम्र ही निकल गयी,
मंज़िल को ज़रा भूल, रास्ते का मज़ा भी लेते जाओ,
तनिक ठहर जाओ, ठहर जाओ, ठहर जाओ ।
जीवन के रिक्त पन्नों पर कुछ चित्र उकेर लो,
धन के संग संग जरा रंग भी बिखेर लो ,
सपनों को विश्राम दे, जरा अपनों में लौट आओ,
तनिक ठहर जाओ, ठहर जाओ, ठहर जाओ ।
लहलहाते पुष्पों से कुछ मुस्कराहट मांग लाओ,
बाहर खेलते बच्चों से खिलखिलाहट उधार ले आओ,
जिंदगी के पहिये को कुछ लगाम दे आओ,
तनिक ठहर जाओ, ठहर जाओ, ठहर जाओ ।
तुम आते हो तो बगिया में हरियाली आती है,
घर के हर कोने में खुशहाली आती है,
जो पतझड़ में बसंत की बहार कर पाओ,
तनिक ठहर जाओ, ठहर जाओ, ठहर जाओ ।
प्रकृति के उपकारों का संज्ञान कर लो,
पंछियों के मधुर करलव का पान कर लो,
भोर ना सही सांझ को ही लौट आओ,
तनिक ठहर जाओ, ठहर जाओ, ठहर जाओ ।
प्यार भरे रिश्तों को नए आयाम दे दो,
मशीन सी जिंदगी को कुछ विश्राम दे दो,
कभी अपनो के साथ 'क्वारंटाइन' हो जाओ,
तनिक ठहर जाओ, ठहर जाओ, ठहर जाओ ।
पलकों को मूँद जरा मन की आँखों से देख लो,
कि जीवन पुस्तक में कुछ खट्टे मीठे परिलेख हो,
बाहर को बाहर छोड़, कुछ देर भीतर चले आओ,
तनिक ठहर जाओ, ठहर जाओ, ठहर जाओ ।
-मेघा शर्मा
22/04/2020
