Monday, July 12, 2021

तनिक ठहर जाओ

कदम से कदम मिलाये कुछ दूर साथ चले आओ,
हांथों में हाथ थामे कुछ पल तो बैठ जाओ,
नयनों से नयन मिलाये कुछ अनकही बातें समझ जाओ,
तनिक ठहर जाओ, ठहर जाओ, ठहर जाओ ।

रेत से फिसलते ये लम्हों को जी लो,
कुछ देर पास रह, मीठी यादें संजो लो,
जिंदगी की भागदौड़ से कुछ वक़्त तो चुरा लाओ,
तनिक ठहर जाओ, ठहर जाओ, ठहर जाओ ।

ऐशोआराम की कश्मकश में जिंदगी पीछे रह गयी,
कुछ बनने-पाने की ख्वाइश में देखो उम्र ही निकल गयी,
मंज़िल को ज़रा भूल, रास्ते का मज़ा भी लेते जाओ,
तनिक ठहर जाओ, ठहर जाओ, ठहर जाओ ।

जीवन के रिक्त पन्नों पर कुछ चित्र उकेर लो,
धन के संग संग जरा रंग भी बिखेर लो ,
सपनों को विश्राम दे, जरा अपनों में लौट आओ,
तनिक ठहर जाओ, ठहर जाओ, ठहर जाओ ।

लहलहाते पुष्पों से कुछ मुस्कराहट मांग लाओ,
बाहर खेलते बच्चों से खिलखिलाहट उधार ले आओ,
जिंदगी के पहिये को कुछ लगाम दे आओ,
तनिक ठहर जाओ, ठहर जाओ, ठहर जाओ ।

तुम आते हो तो बगिया में हरियाली आती है,
घर के हर कोने में खुशहाली आती है,
जो पतझड़ में बसंत की बहार कर पाओ,
तनिक ठहर जाओ, ठहर जाओ, ठहर जाओ ।

प्रकृति के उपकारों का संज्ञान कर लो,
पंछियों के मधुर करलव का पान कर लो,
भोर ना सही सांझ को ही लौट आओ,
तनिक ठहर जाओ, ठहर जाओ, ठहर जाओ ।

प्यार भरे रिश्तों को नए आयाम दे दो,
मशीन सी जिंदगी को कुछ विश्राम दे दो,
कभी अपनो के साथ 'क्वारंटाइन' हो जाओ,
तनिक ठहर जाओ, ठहर जाओ, ठहर जाओ ।

पलकों को मूँद जरा मन की आँखों से देख लो,
कि जीवन पुस्तक में कुछ खट्टे मीठे परिलेख हो,
बाहर को बाहर छोड़, कुछ देर भीतर चले आओ,
तनिक ठहर जाओ, ठहर जाओ, ठहर जाओ ।


-मेघा शर्मा

22/04/2020

ख़्वाबों का आशियाना

जूही की बेल अभिनन्दन करती है,
हरियाली दूब थकावट हर लेती है,
मटके का शीतल जल तुम्हारी तृष्णा हर लेगा,
आँगन का बयार अहंकार दूर कर देगा,
पत्थर की दीवारों को कुछ यूं जिलाया है,
ख़्वाबों का मैंने आशियाना बनाया है।

तनाव को उतार कर खूँटी पर टांक दो,
निश्चिंतता के वस्त्रों को धारण कर लो,
चौक के नल से क्रोध को धो डालो,
प्रसन्नता के तौलिये से ग़मों को पौंछ डालो,
प्रेम और विश्वास का दीवान लगाया है,
ख़्वाबों का मैंने आशियाना बनाया है।

नवरसों को डालकर भोजन पकाया है,
स्नेह का उसमें तड़का लगाया है,
उमंग का अतिरिक्त घी उंढेल कर,
मुस्कान के मीठे गुड़ में मिलाया है,
अपनेपन रुपी थाली में परोसाया है,
ख़्वाबों का मैंने आशियाना बनाया है।

देखो, आँगन का झूला कुछ सन्देश देता है,
जीवन के उतार-चढाव का उपदेश देता है,
विकट परिस्थिति में तुम वृक्ष के तने सा जम जाना,
और उन्नति में तुम फलों की डाल सा झुक जाना,
कुछ इस तरह प्रांगण ने जीवन दर्शाया है,
ख़्वाबों का मैंने आशियाना बनाया है।

चूल्हे पर आशारूपी जल को रख कर,
उसमे संतुष्टि का दूध औटाया है,
थोड़ी समर्पण की अदरक को कूट कर,
भावनाओं रुपी चाय को चढ़ाया है,
मिटटी के घर को जिजीविषा सा महकाया है,
ख़्वाबों का मैंने आशियाना बनाया है।

व्यस्त दिनचर्या से कुछ समय निकाल लेना,
रिश्तों के इन पौधों में थोड़ा पानी डाल देना,
खुशियों रुपी कुछ पुष्प बटोर ले आना,
और घनिष्टता रुपी जूड़े में लगा देना,
धन न सही, तन और मन से सजाया है,
ख़्वाबों का मैंने आशियाना बनाया है।

पंछियों के कलरव का रसपान कर लो,
बच्चों की निश्छलता का अभिमान कर लो,
धुप और छाँव से मिश्रित इस आँगन में,
चिंताओं को भूल कर कुछ विश्राम कर लो,
प्रेम और उत्साह के रंगों से पुतवाया है,
ख़्वाबों का मैंने आशियाना बनाया है।

-मेघा शर्मा

04/01/2021