आसमान की चिडियाँ हैं हम, तेरे बाग की कलियाँ हैं हम।
तुम से रोशन हैं ये जीवन, तेरे आँगन की परीयां हैं हम।।
मॉ कितने प्रेम से तूने सुलाया, पापा ने हर स्वप्न सजाया।
तेरी गोद सा कोई और ना ठौर, रहना साथ हमारे हरदम।।
कष्ट उठा कर तूने पाला, तेरी ममता का ओज निराला।
जख्म हो चाहे कितने फिर भी, तेरी पुचकार लगाती मरहम।।
ऊँचाई का ख्वाब दिखाया, जीत का जज्बा तूने जगाया।
दुनिया दुआ मे बेटा माँगे, मेरे माँ-पा की सोच हैं अनुपम।।
परिश्रम का पाठ पढ़ाया, नीड़र रहना तूने सिखाया।
मोह मे अन्धे जग ने भी माना, नही बेटियाँ किसी से कम।।
जग क्या तेरी करे बराबरी, माँ की ऐसी प्रीत हैं न्यारी।
नही साधारण बेटियाँ मेरी, गंगा जमुना सरस्वती का संगम।।
आसमान की चिडियाँ हैं हम, तेरे बाग की कलियाँ हैं हम।
तुम से रोशन हैं ये जीवन, तेरे आँगन की परीयां हैं हम।।
- माता-पिता को समर्पित मेरी रचना
तुम से रोशन हैं ये जीवन, तेरे आँगन की परीयां हैं हम।।
मॉ कितने प्रेम से तूने सुलाया, पापा ने हर स्वप्न सजाया।
तेरी गोद सा कोई और ना ठौर, रहना साथ हमारे हरदम।।
कष्ट उठा कर तूने पाला, तेरी ममता का ओज निराला।
जख्म हो चाहे कितने फिर भी, तेरी पुचकार लगाती मरहम।।
ऊँचाई का ख्वाब दिखाया, जीत का जज्बा तूने जगाया।
दुनिया दुआ मे बेटा माँगे, मेरे माँ-पा की सोच हैं अनुपम।।
परिश्रम का पाठ पढ़ाया, नीड़र रहना तूने सिखाया।
मोह मे अन्धे जग ने भी माना, नही बेटियाँ किसी से कम।।
जग क्या तेरी करे बराबरी, माँ की ऐसी प्रीत हैं न्यारी।
नही साधारण बेटियाँ मेरी, गंगा जमुना सरस्वती का संगम।।
आसमान की चिडियाँ हैं हम, तेरे बाग की कलियाँ हैं हम।
तुम से रोशन हैं ये जीवन, तेरे आँगन की परीयां हैं हम।।
- माता-पिता को समर्पित मेरी रचना

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